कौन है ISRO Chief Dr. K Sivan

देश के सबसे अहम (Moon Mission) Chandrayaan-2 भले अभी पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाया हो, लेकिन पहले ही प्रयास में लक्ष्य के करीब होना (99%) काबिले तारीफ है। चंद्रयान-2 के लैंडर कि सॉफ्ट लैंडिंग ना हो पाने के बाद वे ( डॉ. के सिवन ) भावुक हो गये और अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए , तब PM Modi ने डॉ. के सिवन को गले से लगाकर पीठ पर हाथ से थप थपाया और उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि मैं आपके चेहरों की मायूसी को समझ सकता हूं। यान से जब संपर्क टूटा , वह क्षण मैंने भी आपके साथ उतना ही महसूस किया था। पूरा देश आपके साथ है, पहले ही प्रयास में इतनी दूरी तक आना बहुत बड़ी कामयाबी है।

दोस्तों अगर आप इसरो के मून मिशन chandrayaan-2 के बारे में अगर नहीं जानते हैं तो मैं इस बारे में आर्टिकल आपको Google पर मिल जाएगा। chandrayaan-2 के बारे में जानने के लिए यहां पर Click करें।

 

अब हम जानेंगे डॉ. के सिवन के बारे में।

 

जैसा कि दोस्तों आप लोग जानते ही होंगे, डॉ. के सिवन ISRO के Chief है , उनके जीवन भी chandrayaan-2 की तरह ही अद्भुत अविस्मरणीय और अचंभित करने वाला है। Chandrayaan-2 की ही तरह उन्होंने भी कई चुनौतियों को पार किया है। Lander Vikram भले ही चंद्रमा की सतह को छूने से चूक गया हो, लेकिन जिस तरह से orbitar चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है, उसी तरह डॉ. के सिवन ने भी अपने जीवन में कई चुनौतियों से पार पाते हुए उपलब्धियां हासिल की है।

दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के तटीया जिले कन्याकुमारी स्थित सराकल्लविलाई 14 अप्रैल 1957 मैं डॉ. के सिवन का जन्म हुआ था। उनके पिता एक किसान थे, डॉ. के सिवन एक सरकारी स्कूल से तमिल माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा शुरू की है। वे पढ़ाई में अच्छे थे। डॉ. के सिवन बताते हैं कि जब वह College में थे तो खेतों में पिता की मदद क्या करते थे और सिवन के पिता गर्मियों में आम का कारोबार भी करते थे खुद सिवन उनके साथ आम के बाग में काम करते थे। जब वे घर पर होता था तो उनके पिता खेतों में काम करने के लिए मजदूरों को नहीं बुलाते थे। इसका कारण आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के बावजूद सिवन ने नागेरकोयल के एसटी हिंदू कॉलेज से B.Sc गणित की पढ़ाई पूरी की। वह भी 100 प्रतिशत अंकों के साथ। वह स्नातक करने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य रहे। इसके बाद पिता मैं अपना मन बदल लिया। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि सभी बच्चों की उच्च शिक्षा (higher education ) का खर्च उठा पाते। इसके बाद सिवन ने 1980 मैं मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से Aeronautical Engineering की । इसके बाद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (IIS) से Engineering मैं स्नातकोत्तर किया।2006 में उन्होंने ITI मुंबई से Aerospace Engineering में PhD की डिग्री हासिल की।

डॉ. के सिवन बताते हैं कि उनके पिता ने जानबूझकर उन्हें उस कॉलेज में दाखिला दिलाया, जो उनके घर के सबसे करीब था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकि मैं कॉलेज के बाद उनकी मदद कर सकूं, वह कहते हैं कि मैंने पहली बार सैंडल तब पहने जब मैं Madras institute of technology में पढ़ने के लिए गया इससे पहले में आमतौर पर नंगे पैर ही रहता था।
डॉ सिवन को खाली समय में कामिल classical संगीत सुनना और बागवानी करना पसंद है। उनकी पसंदीदा film राजेश खन्ना अभिनीत आराधना ( 1969 ) है।

 

डॉ. के सिवन को रॉकेट मैन (Rocket man) भी कहते हैं

 

1982 मैं इसरो में शामिल हुए थे। ISRO के चेयरमैन का पद संभालने से पहले वह Vikram sarabhai space centre के निर्देशक थे, जो रॉकेट बनाता है। उन्हें साइक्रायोजेनिक इंजन, PSLV, GSLV और रीयूसेबल लांस व्हीकल कार्यक्रमों में योगदान देने के कारण इसरो का रॉकेट मैन भी कहा जाता है।

 

ISRO Logo
ISRO Logo

 

ISRO से जुड़ने के बाद

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़ने के बाद उन्होंने Polar satellite launch vehicle ( पीएसएलवी) प्रोजेक्ट में अपना योगदान देना शुरू किया। इसके बाद संगठन ने विभिन्न अभियानों में काम करने का मौका दिया अप्रैल 2011 में वह जीएसएलवी (GSLV) के परियोजना के निर्देशक बने। सिवन के योगदान को देखते हुए जुलाई 2014 में उन्हें इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम ( liquid propulsion system) का निर्देशक नियुक्त किया गया। 1 जून 2015 को उन्हें विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के निर्देशक बना दिया गया। 15 जनवरी 2018 को डॉ. के सिवन ने ISRO के पद संभाला।

फरवरी 2017 में भारत ने 104 Satellite को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजकर विश्व record बनाया। डॉ. के सिवन ने इसमें अहम भूमिका अदा की थी। यह इसरो के विश्व रिकॉर्ड भी है। 15 जुलाई 2019 को जब chandrayaan-2 अपने मिशन के लिए उड़ान भरने ही वाला था कि कुछ घंटों पहले तकनीकी कारणों से इसे रोकना पड़ा इसके बाद सिवन ने एक उच्चस्तरीय टीम बनाई ताकि दिक्कत का पता लगाया जा सके और इसे 24 घंटे के अंदर ही ठीक कर दिया। 7 दिन बाद 22 जुलाई 2019 को डॉ. के सिवन के नेतृत्व में इसरो ने chandrayaan-2 मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया। लेकिन 7 सितंबर की रात को अपने आखिरी चरण में चंद्रमा की सतह से 2 किलोमीटर दूर Lander Vikram से संपर्क टूट गया। सभी ISRO+ NASA वैज्ञानिकों का मानना यह था कि यह मून मिशन 99% सफल हुआ था।

 

डॉ. के सिवन को कौन-कौन सी Award से सम्मानित किया गया है ?

 

डॉ. के सिवन को 1999 में डॉ. विक्रम साराभाई रिसर्च अवार्ड से सम्मानित किया गया। 2007 में उन्हें ISRO मेरिट अवार्ड से नवाजा गया। 2011 में डॉ. वीरेन राय स्पेस साइंस अवॉर्ड और अप्रैल 2014 में चेन्नई की सत्यभामा यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि से वे सम्मानित हुए। 28 अप्रैल 2019 को पंजाब यूनिवर्सिटी के कॉन्वोकेशन मैं उपराष्ट्रपति venkaiah Naidu ने उन्हें विज्ञान रत्न से सम्मानित किया।2019 में तमिलनाडु सरकार ने उन्हें Dr. APJ Abdul kalam अवार्ड से सम्मानित किया है। साथ ही उन्होंने कुछ किताब भी लिखे हैं।

एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेने के बाद सिवन ने अपनी मेहनत लगन और काबिलियत के दम पर इसरो के Chairman पद तक का लंबा सफर तय किया है। जिस प्रकार पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन कहा जाता है उसी प्रकार डॉक्टर के सिवन को “रॉकेट मैन” के नाम से पहचाने जाते हैं।

 

 


दोस्तों यही था डॉ. के सिवन के बारे में कुछ जानकारी यह जानकारी आप लोगों को कैसा लगा अगर अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों को जरुर शेयर करें और अगर कुछ आपके मन में प्रश्न है तो नीचे कॉमेंट या फिर ई-मेल जरूर करे। धन्यवाद

 

Email:- techpixofficial@gmail.com

 

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