पेड़-पौधे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य | GyanVigyan-1

-: पेड़-पौधे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य :-

प्रश्न:- क्या पेड़-पौधे सांस लेते हैं अगर लेते हैं तो कैसे ?

– हां, पेड़-पौधे भी हमारी तरह रात और दिन सांस लेते हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि दिन में पौधे प्रकाश संश्लेषण किया भी करते हैं अपना खाना बनाने के लिए इसमें वे वायुमंडल की और अपने द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड का प्रयोग कर लेते हैं इससे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का संतुलन बना रहता है प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रकाश यानी सूर्य के रोशनी में होता है तो रात में सूर्य की रोशनी ना होने के कारण व प्रकाश संश्लेषण क्रिया नहीं करते हैं रात में वे श्वसन की क्रिया ही करते हैं।

 

प्रश्न:- फल पकने पर मीठा क्यों होता है?

– वास्तव में किसी भी फल का स्वाद उसमें उपस्थित योगिक पर निर्भर करता है । आमतौर पर किसी भी फल के अंदर चीनी, कुछ अम्ल, विटामिन,स्टार्च, प्रोटीन और सेल्यूलोस होते हैं। ये सभी पदार्थ फल के अंदर मिश्रित अवस्था में होते हैं। इन पदार्थों की मात्रा अलग-अलग किस्म के फलों में अलग-अलग होते हैं। जिन फलों में चीनी की मात्रा अधिक होती है, उनका स्वाद मीठा होता है। और जिन फलों में अम्ल की मात्रा अधिक होता उनका स्वाद खट्टा होता है। आमतौर पर कच्चे फलों मे अम्लो की मात्रा ज्यादा होता है और पक जाने पर अम्लो की मात्रा कम हो जाती है। लेकिन चीनी की मात्रा बढ़ जाती है।यही कारण है कि कच्चा आम खट्टा और पका आम मीठा होता है।

 

प्रश्न:- छुई-मुई (लज्जावती) का पौधा हाथ लगाने पर मूरझा क्यो जाते हैं?

– इस पौधे का बोटैनिकल नाम “मिमोसा प्यूडिका” है। लज्जावती का पौधा इंसानों के हाथ लगने से ही नहीं उनकी किसी भी बाहरी चीजों के छूट जाने से भी सिकुड़ जाता है। इसीलिए इसे छुईमुई पौधा भी कहा जाता है। छूते ही सिकुड़ने की अपनी प्रकृति के चलते यह पौधा जानवरों की खाने से भी बचा रहता है जैसे ही कोई जानवर इसे खाने की कोशिश करता है इसकी पत्तियां सिकोतर सूखी पत्तियों जैसी हो जाती है जिससे जानवर इसे बेजान पौधा समझ कर छोड़ देते हैं।
लज्जावती या छुईमुई पौधा अत्यंत संवेदनशील होते हैं। वैज्ञानिक का कहना है कि इस पौधे की पत्तियां कई कोशिकाओं से बनी होती है जिनमें द्रव भरा रहता है। कोशिकाओं कार्य ही द्रव्य इसकी पत्तियो के खड़े रह पाने में मदद करता है। हमारे या किसी अन्य जीव के अथवा बारिश के पानी या तेज हवा के चलने पर किस पौधे में भरे द्रव का दाब कम हो जाता है और इसी कारण से की पत्तियां सिकुड़ जाती है।
ये पौधा मुख्य रूप से भारत के गर्म प्रदेशों में पाया जाता है। बारिश के मौसम में इस पौधों में बैंगनी, गुलाबी व नीले रंग के पुष्प होते हैं। इसके कई औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है।

 

प्रश्न:- क्या पेड़-पौधे बीमार होते हैं अगर होते हैं तो कैसे पता करें ?

– पेड़ पौधे हमारे जीवन में अहम भूमिका निभाते हैं जैसे कि हमें ऑक्सीजन देना खाने के लिए फल रहने के लिए घर अलमारी,रेक और भी कई तरीके के चीज होती है। हम इंसानों की तरह पेड़ पौधे भी बीमार होते हैं और उनका बीमारी का पता लगाया जा सकता है कई बार गे पौधे बीमारी नहीं दर्शाते हैं और कई बार हमें बाहर से ही पता चल जाता है कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जिनके माध्यम से आप जान सकते हैं पौधा बीमार है।

1.  पौधे की बीमारी का पता करने के लिए सबसे पहले पौधे की पत्तियों को देखना चाहिए पौधे की पत्तियां बीमार की अवस्था में हमेशा पीली पड़ चुकी होती है और उनमें काले धब्बे भी आ चुके होते हैं अगर आपको ऐसी ही स्थिति में किसी पौधे की पत्तियां नजर आती है तो इसका मतलब यह है कि पौधा बीमार हो चुका है।
2.  अगर पौधों की पत्तियां बेसमय ही गिर रही है तो ऐसे समय में समझ जाना चाहिए कि आप का पौधा बीमार हो चुका है।
3.  अगर आप के पौधे में बीज रहते हैं लेकिन विज के फल बनने में समय लगता है या फल बन ही नहीं पाते हैं ऐसे समय में आपको समझ जाना चाहिए कि आप का पौधा बीमार की कगार पर है।
4. अगर आप के पौधों के फूलों में बार-बार कीड़े पड़ जाते हैं तो ऐसे में भी आपको समझ जाना चाहिए कि पौधा अब स्वस्थ नहीं रहा।इसके लिए आपको समय-समय पर कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए जिससे पौधे ज्यादा समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।
5. बीमारी की अवस्था में पौधा टेढ़ा होने लगता है और वह सीधा खड़े नहीं हो पाता है। आप जितना भी कोशिश करें लेकिन पौधा नीचे की तरफ झुका चला जाता है इसका मतलब यह होता है कि पौधा अब बीमार हो गया है।

दोस्तों इन सब प्रकार से आप किसी भी पौधों की बीमारी का पता लगा सकते हैं उसके बाद आप पौधे का सही इलाज शुरू कर सकते हैं। आप अपने पौधों का विशेष ख्याल रखें क्योंकि वे बेजुबान होते हैं लेकिन उनसे हमारे जीवन जुड़ा हुआ है।

 

प्रश्न:- क्या पेड़-पौधों में सूरज की रोशनी या धूप का कोई असर पड़ता है ?

– दोस्तों इंसानों की तरह पेड़ पौधों को भी सजीव वस्तुओं में माना जाता है। उनमें भी इंसानों की तरह त्वचा पाई जाती है, लेकिन उनकी स्क्रीन पर धूप का कोई असर नहीं होता है। वह सूरज की तेज रोशनी में नहीं जलते और हरे-भरे रहते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है ऐसा कैसे संभव हो सकता है जब सूरज की किरणों में हमारा शरीर जलती है, तो पेड़-पौधों पर इसका असर क्यों नहीं पड़ता हाल ही में हुए एक नए शोध में वैज्ञानिक के हाथ कुछ नए तथ्य लगे हैं जिनमें चौंकाने वाली बातें सामने आई है।तो चलिए जानते हैं पेड़ पौधों में ऐसी क्या खासियत होती है जिससे उन पर धूप का कोई असर नहीं होता ।
कुछ रिसर्चर का मामना है कि पौधों के पास सनस्क्रीन होती है ,जो कि उन्हें सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती है। लेकिन कुछ वैज्ञानिक ऐसे भी मानते हैं की अल्ट्रावायलेट किरणें पौधों को भी नुकसान पहुंचाती है। जैसा की इंसानों में देखा गया है की अल्ट्रावायलेट किरणें हम पर ज्यादा इफेक्ट डालती है। वैसे ही पौधों पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही ये किरणें पौधों में DNA को भी काफी नुकसान पहुंचा सकता है। तू जाहिर है कि अल्ट्रावायलेट किरणो पौधों के विकास में भी बाधा डालती होगी। लेकिन इसके बावजूद उन पर कोई असर नहीं पड़ता। तो क्या हम ऐसा कह सकते हैं कि पौधों के पास भी सनस्क्रीन है जो उनकी रक्षा करता है।

रसायन विज्ञानी “टिमोथी जीवियर” और पड्यू विश्वविद्यालय मैं उनके सहयोगीयों ने पाया कि पौधों विशेष अणु, जिन्हें Sinapate एस्टर कहा जाता है। यह अणु किसी पौधे में अल्ट्रावायलेट किरणों को इसकी पत्तियों की गहराई तक जाने से रोकता है जो कि इस पौधे के विकास को रोकता है।
इस प्रोसेस को समझने के लिए रिसर्च टीम ने अणुओं को गैसिय अवस्था में बदला और उन पर अल्ट्रावायलेट लाइट का यूज किया। इस तरह उन्होंने पाया कि Sinapate एस्टर यूवीबी स्पेक्ट्रम मैं हर तरंग दैध्य पर विकिरण को भिगोने में सक्षम है ऐसे में जाहिर है कि पौधों पर रासायनिक यौगिको के एक कोटिंग भी कारण हो सकती है कि यह सबसे बनस्पति की पत्तियों पर देखने के बावजूद भी दिखाई नहीं देती। ऐसे इसलिए होता है क्योंकि ये काफी पतली होती है हालांकि इस एस्टर को मानव सूर्य ब्लॉक के प्रयोजनों के लिए कस्टमाइज किया जा सकता है या नहीं यह अभी पता नहीं चल सका है।

 

प्रश्न:- क्या पेड़-पौधे भी मांसाहारी होते हैं ?

– आज तक अपने सुना होगा इंसान और जानवर मांसाहारी होते हैं लेकिन पौधे भी मांसाहारी होते हैं ये वाक्य शायद आपने पहली बार सुना । जी हां प्रकृति में कुछ ऐसे पौधे हैं जो सीधा जानवर खा जाते हैं , और यह पौधे बहुत तरह के होते हैं, इस आर्टिकल में हम आपको मांसाहारी पौधे के बारे में जानकारी देंगे। तो चलिए जानते हैं।

 

1. ट्रॉपिकल पिचर पौधा:- पौधे को सबसे अलग बनाता है उसके मटके के आकार के पत्ते, जो 1 फुट लंबे तक हो सकते हैं। और यह न केवल कीडो को पकड़ने और पचाने के लिए आदर्श है, लेकिन छोटे छिपकली, उभयचर और यहां तक कि स्तनधारी भी। किसी किसी के ये कप इतने बड़े होते हैं कि इनमें बंदर पानी पीते हैं।
2. कोबरा लिली:- इसका नाम कोबरा लिली इसलिए पड़ा क्योंकि इसका आकार कोबरा सांप जैसा है जो हमले करने वाला हो ।ये पौधा इतनी पेशाचिक है कि ना ये सिर्फ अपनी सुगंध से किड़ो को अपनी ओर खींचता है, बल्कि अपने अंदर कई रास्ते बनाए हुए हैं जिससे कि कीड़ो को लगता है वे इनसे बाहर आ जाएंगे पर वो और अंदर चले जाते हैं।
3. ट्रिगर पौधा:- अभी तक ये पता नहीं चला है कि ये पौधा असल में मांसाहारी है या सिर्फ अपने आप को परेशान करने वाले कीड़ों से बचाने के लिए करता है। इसमें छोटे-छोटे बाल होते हैं जो चिप चिप होते हैं इनसे छोटे कीड़े चिपक जाते हैं और फिर ये पौधा इन बालों से पाचन एंजाइम छोड़ के इनको पचा लेते हैं।
4. ट्रीफिओफाइलम:- इसका जीवन चक्र बिल्कुल एक एलियन जैसा है। सबसे पहले ये अंडाकार के आकार का पत्ता होता है। फिर इसके फूलों के समय ये ग्रंथियों के आकार का चिपचिपे पत्ते निकलता है जो कीड़ों को चिपकार उनको पचा लेता है और आखिर में ये बेल बन जाते हैं जिसके पास नोकीले पत्ते होते हैं जो दूसरों पौधों पर चढ़ने के काम आता है।
5. मोकासिन पौधा:- यह पौधा मांस खाने वालो मैं आता है इसकी सुगंध से किड़ा , जानवर कुछ भी छोटे आकार का आ जाये वो बचता नहीं है। वे इसके मोकासिन आकार के कप में आकार पांच जाते हैं। इसकी खास बात यह है कि ये फूलों वाली पौधे (जैसे सेब) से ज्यादा मिलता जुलता है, ना कि मांसाहारी पौधे से।

 

 

  • कीटाहारी या मांसाहारी पौधे की कुल 400 जातियां पाई जाती है, जिनमें से प्राय 30 जातियां भारत में पाई जाती है। ये पौधे ऐसे स्थानों पर पनपते हैं जहां नाइट्रेट का अभाव रहता है, अथवा वे जमीन के नाइट्रोजन को उपयोग में लाने में असमर्थ होते हैं। जीवन के लिए प्रोटीन अत्यंत आवश्यक है और इसे प्राप्त करने के लिए पौधों को नाइट्रोजन मिलना चाहिए। इसीलिए यह पौधे मांसाहारी या कीटाहारी होते हैं।

 


 

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